तुम अकेले नहीं

 

हम आज भी वही है जहा कल थे
तुम न जाने किन गलियो में खो गए
बेनाम कोनसी ज़िन्दगी बिता रहे हो
कहा खोए बैठे हो
किसके इंतज़ार में
खामोश हो
परेशां हो
ज़रा नज़रो को उठा कर थोड़ी रेहमत तो करो खुद पर
हम है अभी
तुम अकेले नहीं
ज़रा नज़रे मिलाकर थोड़ी रेहमत तो करो हम पर
की तुम हो अभी
हम भी अकेले नहीं ।।



DEEPANSHU SAINI